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हाईकोर्ट पहुंचा शिमला जिला परिषद चुनाव में देरी का मामला, 13 सदस्यों ने दाखिल की याचिका

जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव अब तक नहीं होने पर हाईकोर्ट पहुंचे 13 सदस्य

डीसी को जल्द बैठक बुलाकर चुनाव कराने के निर्देश देने की मांग

दो बैठकें होने के बावजूद चुनाव नहीं, ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित होने का दावा


हिमाचल प्रदेश में मई 2026 में हुए पंचायती राज चुनाव के बाद शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अब तक नहीं होने का मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने चुनाव में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ याचिका दायर की है।

ममता समेत 13 नवनिर्वाचित सदस्यों ने हाईकोर्ट से मांग की है कि शिमला के उपायुक्त को जल्द बैठक बुलाकर जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

मामला अदालत पहुंचने के बाद अब जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के रुख पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

31 मई को घोषित हुआ परिणाम, 6 जून को सदस्यों ने ली शपथ

याचिका के अनुसार शिमला जिला परिषद चुनाव का परिणाम 31 मई 2026 को घोषित हो गया था। इसके बाद 6 जून को जिला परिषद के सभी 25 निर्वाचित सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।

नियम के अनुसार इसके बाद जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाना था। लेकिन सदस्यों का आरोप है कि शपथ ग्रहण के बाद भी चुनाव नहीं कराया गया।

नवनिर्वाचित सदस्यों का कहना है कि चुनाव के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद खाली रहने से जिला परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

दो बार बैठकें बुलाई गईं, लेकिन चुनाव का एजेंडा स्पष्ट नहीं होने का आरोप

याचिका में कहा गया है कि इसके बाद 27 जून और 3 अगस्त को जिला परिषद की बैठकें बुलाई गईं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन बैठकों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर एजेंडा स्पष्ट नहीं था।

सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ बैठकों में उपायुक्त की मौजूदगी नहीं रही, जिसके कारण चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब सभी निर्वाचित सदस्य शपथ ले चुके हैं और जिला परिषद का नया कार्यकाल शुरू हो चुका है, तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में लगातार देरी का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

जनवरी में खत्म हो चुका था पिछली जिला परिषद का कार्यकाल

याचिका में जिला परिषद की पिछली व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। सदस्यों के अनुसार पिछली जिला परिषद का कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो चुका था।

इसके बाद पंचायती राज चुनाव कराए गए और नए सदस्यों का निर्वाचन हुआ। परिणाम घोषित होने के बाद निर्वाचित सदस्यों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ भी ले ली, लेकिन जिला परिषद के शीर्ष पदों का चुनाव अब तक नहीं हो पाया है।

सदस्यों का कहना है कि निर्वाचित निकाय के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बिना जिला परिषद प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही है।

विकास कार्यों पर असर पड़ने का दावा

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष यह भी दावा किया है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव लंबित रहने से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और योजनाओं पर असर पड़ रहा है।

जिला परिषद ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं, स्थानीय जरूरतों और विभिन्न विकास कार्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में निर्वाचित निकाय के शीर्ष पदों का खाली रहना सदस्यों के अनुसार प्रशासनिक और विकासात्मक स्तर पर परेशानी पैदा कर रहा है।

सदस्यों का तर्क है कि चुनाव में अनावश्यक देरी से निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका भी प्रभावित हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से जिला परिषद के माध्यम से उठाने में दिक्कत आ रही है।

हाईकोर्ट से निश्चित समय-सीमा में चुनाव कराने की मांग

13 नवनिर्वाचित सदस्यों ने हाईकोर्ट से मांग की है कि जिला प्रशासन को निश्चित समय-सीमा के भीतर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाने के निर्देश दिए जाएं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को और लंबा खींचने के बजाय प्रशासन को जल्द बैठक बुलाकर निर्वाचित सदस्यों के बीच चुनाव करवाना चाहिए, ताकि जिला परिषद पूरी तरह कार्यशील हो सके।

अब इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर है।

चुनाव में देरी को लेकर पहले से गरमाई हुई है सियासत

शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी का मुद्दा केवल अदालत तक सीमित नहीं है। इसे लेकर हिमाचल की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो चुके हैं।

बीते शनिवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर जिला परिषद चुनाव को टालने को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया।

इसके जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नेता प्रतिपक्ष पर पलटवार किया। ऐसे में अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का भी हिस्सा बन गया है।

अब हाईकोर्ट के रुख पर टिकी नजर

शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव मई में हुए पंचायती राज चुनाव के बाद अब तक लंबित है। 25 निर्वाचित सदस्यों में से 13 सदस्यों की ओर से अदालत का रुख किए जाने के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि प्रशासन को जल्द चुनाव कराने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। अब हाईकोर्ट इस मामले में क्या निर्देश देता है और चुनाव प्रक्रिया को लेकर प्रशासन को कितनी समय-सीमा मिलती है, यह आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होगा।

फिलहाल चुनाव में देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और ग्रामीण विकास से जुड़े कामकाज पर इसके प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।